कोरोना महामारी के दौरान हम सामान्य कक्षाओं में सभी के परिवार के सदस्यों का हालचाल पूछते थे उनकी दिनचर्या के बारे में बात करते थे और इसके अतिरिक्त कभी सप्ताहांत पर एक ऑनलाइन मीटिंग रखकर उसमें कुछ अंताक्षरी गाने चुटकुले कहानियां इत्यादि बच्चों के साथ मनोरंजक तरीके से प्रस्तुत करते थे जिससे कि उन्हें घर में रहते हुए अपने दोस्तों के साथ हंसी खेल का मौका मिले और साथ ही साथ विद्यालय के प्रति उनकी छवि और मनोवृति सकारात्मक रहे।
ऑनलाइन मीटिंग में बच्चों से मिलना होता था हर दिन उनके स्वास्थ्य की जानकारी उनके घर के लोगों की जानकारी ली जाती थी साथ ही कोरोनावायरस ने के कई उपाय उन्हें बताया जाते थे आसपास से घट रही घटनाओं की जानकारी ली जाती थी और उनसे उन्होंने क्या सीखा है उन्हें क्या समझ आया यह पूछा जाता था
प्रिंट और नॉन प्रिंट मीडिया दोनों में प्रचलित विज्ञापनों को देखिए इनमें पुरूषों और महिलाओं को किस प्रकार चित्रित किया गया है और विज्ञापनों में उनके द्वारा किए जाने वाले क्रियाकलापों का विश्लेषण करने का प्रयास कीजिए (संकेतः देखिए कि वे किन उत्पादों का प्रचार कर रहे हैं, और किस प्रकार की भूमिका निभा रहे हैं,इत्यादि)। अपने अवलोकनों को साझा कीजिए।
‘ खिलौना आधारित शिक्षाशास्त्र ’ को लागू करने की प्रक्रिया में कई खिलौने बनाए जाते हैं। कक्षा - सत्र के बाद आप सभी बनाए गए खिलौनों का प्रभावी ढंग से उपयोग कैसे कर सकते हैं ?
कॅरोना वायरस के दौरान आप अपने विद्यार्थियों के साथ
ReplyDeleteकोरोना महामारी के दौरान हम सामान्य कक्षाओं में सभी के परिवार के सदस्यों का हालचाल पूछते थे उनकी दिनचर्या के बारे में बात करते थे और इसके अतिरिक्त कभी सप्ताहांत पर एक ऑनलाइन मीटिंग रखकर उसमें कुछ अंताक्षरी गाने चुटकुले कहानियां इत्यादि बच्चों के साथ मनोरंजक तरीके से प्रस्तुत करते थे जिससे कि उन्हें घर में रहते हुए अपने दोस्तों के साथ हंसी खेल का मौका मिले और साथ ही साथ विद्यालय के प्रति उनकी छवि और मनोवृति सकारात्मक रहे।
ReplyDeleteऑनलाइन मीटिंग में बच्चों से मिलना होता था हर दिन उनके स्वास्थ्य की जानकारी उनके घर के लोगों की जानकारी ली जाती थी साथ ही कोरोनावायरस ने के कई उपाय उन्हें बताया जाते थे आसपास से घट रही घटनाओं की जानकारी ली जाती थी और उनसे उन्होंने क्या सीखा है उन्हें क्या समझ आया यह पूछा जाता था
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