कोर्स 05 गतिविधि 6 : अपनी समझ साझा करें

 

एक ऐसी स्थिति के बारे में सोचें जब आपके बेटे/बेटी ने कुछ ऐसा किया हो जिसे आपने नापसंद किया हो। आपको वास्तव में इस बारे में बहुत बुरा लगा/आहत पहुंचा। अब इनके आलोक में स्थिति का विश्लेषण करें : उन्होंने क्या किया था?

 

उन्होंने इस तरह का व्यवहार क्यों किया/क्यों कहा? आपने इस पर कैसी प्रतिक्रिया दी? इस स्थिति में आप और क्या कर सकते थे

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  1. ऐसी स्थिति जब बेटे ने कुछ ऐसा किया

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  2. पहली बार जब कक्षा नवी की इकाई परीक्षा में रात्रि को 9:00 बजे ही बेटा सो गया था। जब मैंने उसे जाकर पूछा कि क्या उसकी तैयारी हो गई है तो उसने बोला कि नहीं दो पाठ नहीं समझ में आए वे छोड़ दिए तो मुझे सचमुच बहुत बुरा लगा कि इस तरह की आदत एक विद्यार्थी जीवन में शुरू होना उसके लिए सही नहीं है मैंने उसे बैठकर बहुत समझाया प्यार से यह भी बताया कि विद्यार्थी जीवन का एकमात्र लक्ष्य अपने ज्ञान के प्रति पूर्ण समर्पण है इसके अलावा अन्य चीजें जो से आकर्षित करती है वह उसे मार्ग को अवरुद्ध करने वाली है फिर बैठ कर उधर दोनों पाठ की समझाएं दूसरे दिन जो वह परीक्षा देकर वापस आया तो बहुत ही प्रसन्न मुद्रा में था और उसे समझ आ चुका था कि कार्य सफलता पूर्ण संपन्न करने में जो खुशी है वह उसके प्रति कमी को या अपनी कमजोरियों को छुपाने में कभी नहीं मिल सकती।

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  3. आठवी कक्षा में बेटे ने अपनी पुस्तिका में शिक्षकों द्वारा लिखाया गया कुच भी कार्य पूर्ण नही किया और उस वजह से मुझे
    पूरी कक्षा में शिक्षिका ने बहुत भला बुरा कहा तब् मुज़े बहुत बुरा लगाl इसपर मै बहुत क्रोधित होकर उससे २ दिन बात नही कि थीl बाद में उससे शान्ति से बात करके क्या परेशानी है यह जानने कि कोशिश की और उसपर हल निकालाl

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  4. कक्षा में कम अंक आने पर बात की तो बेटे ने साफ कह दिया मैं छह छह घंटे नहीं पढ सकता तो एक बार बुरा लगा पर
    बाद में साइस छुड़ा दी

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  5. बेटा जब नौवी कक्षा में था तब उसकी प्रीलियम परीक्षा का परिणाम आया | उसे बहुत काम अंक मिले थे | उसके शिक्षिका से मिलने पर बेटे की वह बहुत तारीफ़ करने लगे की यह बहुत ही होनहार है | आपको रसायनशास्त्र विषय की और विशेष ध्यान देना है | बस शिक्षिका की यही बात सुनकर वह नाराज हो गया और मुझसे बात नहीं की | थोड़ा माहोल ठंडा होने के बाद मने बेटे बात की की इसका हल निकल सकते है | आपको विज्ञानं में क्या परशानियाँ होती है उसने मुझे बताया | मेरी सहेली रसायनशास्त्र की शिक्षिका है मैंने उसके पास पढ़ने के लिए भेजी और वह मेहनत से पढ़ने लगा |

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  6. मेरी सहेली का बेटा जब 10 वीं कक्षा में था तब अपने दोस्तों की संगति में बहक गया था| स्कूल बंक करके फिल्म देखने चला जाता, घर देर से आता, माता-पिता से गलत तरीके से बात करता, बात-बात पर क्रोधित हो जाता | मेरी सहेली बहुत परेशान रहने लगी एक दिन उसने अपनी समस्या मुझे बताई | हमदोनों पहले उसके शिक्षक से मिले उनसे जानकारी लेकर फिर काउंसिलर से मिले उन्हें बेटे की समस्या से अवगत कराया | उन्होंने बेटे से बात की उसे प्रेम से समझाया | उनकी बातों का सहेली के बेटे पर साकारात्मक प्रभाव पड़ा धीरे-धीरे उसके व्यवहार में परिवर्तन आने लगा और वो सामान्य स्थिति में आ गया|

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  7. एक बार मेरी बेटी अपने सहपाठी की नोटबुक चुरा लाई थी , जब मुझे इस बात का पता चला तो मुझे बहुत बुरा लागा | मैं शांत रही और उसे प्रेम से समझाया , उसके आत्मविश्वास को जागृत किया | वह अपनी इस हरकत के लिए शर्मिंदा हुई और फिर भविष्य में उसने ऐसा कभी नहीं किया|

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  8. मेरा बेटा वैसे पढने में होशियार है, पर पता नही क्यों पहली बार कक्षा 10 की प्रथम सत्र परीक्षा में रात 8 :00 बजे ही सो गया। जब मैंने उससे पूछा कि क्या उसने अगले दिन की गणित परीक्षा की तैयारी कर ली है ? तो उसने कहा कि नहीं कुछ सवाल उसे नहीं समझ में आए तो वे छोड़ दिए यह सुनकर मुझे सचमुच बहुत बुरा लगा कि इस तरह की आदत एक होनहार विद्यार्थी में शुरू होना उसके भविष्य के लिए उचित नहीं है| मैंने उसे बैठकर प्रेम से समझाया कि विद्यार्थी का एकमात्र लक्ष्य अपने ज्ञान के प्रति पूर्ण समर्पण भाव होना चाहिए इसके अतिरिक्त अन्य जो भी चीजें आकर्षित करती है वे उसके लक्ष्य मार्ग को बाधित करने वाली, भटकाने वाली होती हैं| फिर बैठकर कठिन सवालों को हल करके समझाया,उसका आत्मविश्वास बढ़ा| अगले दिन जब वह परीक्षा देकर वापस आया तो बहुत ही प्रसन्न था, उसे समझ आ चुका था कि कार्य को सफलता पूर्वक संपन करने में जो प्रसन्नता मिलती है वह उसके प्रति उपेक्षा भाव या अपनी कमजोरियों को छुपाने से कभी नहीं मिल सकती।

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  9. दसवीं कक्षा में मेरा पुत्र क्लास बंक करके पिक्चर देखने गया तब मुझे बहुत बुरा लगा था

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  10. मैं चाहती थी कि मेरा बेटा अपने डैडी की तरह पायलट बने , बेटे ने साफ कह दिया मैं तो इंजीनियर बनना चाहता हूँ एक बार बुरा लगा पर बाद में उसे प्रोत्साहित किया I

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  11. यदि मेरा बेटा ऐसा कोई कार्य कर भी ले जो मुझे नापसंद हो तो मैं उस पर क्रोधित न होकर उसने ऐसा क्यों किया इस बात को जानने का प्रयास करूंगी तथा उसे समझाने की कोशिश करूंगी।

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  12. एक बार मेरे बेटे ने अपशब्द बोला था । उस समय मुझे गुस्सा आया था । पर फिर मैंने सोचा कि आखिर वह ऐसे अपशब्द कहाँ से सीखा, तो उत्तर मिला कि अपने परिवेश से ही । इसलिए मैंने तय किया कि पहले घर के बड़ों को अपना आचरण उचित रखना चाहिए ।

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  13. आठवी कक्षा में बेटे ने अपनी पुस्तिका में शिक्षकों द्वारा लिखाया गया कार्य पूर्ण नही किया और उस वजह से मुझे
    फोन पर शिक्षक ने बहुत भला बुरा कहा तो बहुत बुरा लगा l इस पर मै बहुत क्रोधित हुई और फिर उसे समझाया |

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