कोर्स 07 गतिविधि 6 : अपने विचार साझा करें
अपने जिले/राज्य के लिंग अनुपात के जनगणना के आँकड़ों को देखिये और उनकी तुलना मे राष्ट्रीय लिंग अनुपात से कीजिये। लिंग अनुपात के संदर्भ मे आपके जिले/राज्य के अच्छे अथवा बुरे प्रदर्शन के क्या कारण हो सकते हैं?
अपने विचारों को साझा कीजिये।
अपने जिले के लिंग अनुपात के
ReplyDeleteझारखंड में अनुमानित जनसंख्या 40,100,376 है। जिसमें पुरुषों की अनुमानित जनसंख्या 20,585,408 है एवं महिलाओं की जनसंख्या19,514,967 है। यहाँ लिंग अनुपात प्रायः महिलाओं के साथ नहीं होता है।इसका मुख्य कारण है कि आजकल अधिकतर व्यक्ति पुत्र की कामना करते हैं।
ReplyDeleteहमारे राज्य में लिंग अनुपात केवल पुरुषों के साथ
ReplyDeleteहोता है क्योंकि आजकल ज्यादातर लोगों को पुत्र की ही इच्छा रहती है।बहुत कम ही लोग ऐसे हैं जो पुत्री की कामना करते हैं।
हमारे आधार पर वर्तमान में लिंग समानता सबसे अच्छा साधन है जो आज की शिक्षा प्रणाली के द्वारा बच्चों को आगे बढ़ने में सहायता करता है
ReplyDeleteहरियाणा प्रदेश में वर्तमान में महिला-पुरूष लिंगानुपात 1000(पुरूष) - 935(महिला) है। यह पहले की तुलना में बढ़ा ही है। वर्तमान समय में समाज में इस विषय पर जागरूकता लाई गई है। लड़का-लड़की में भेदभाव धीरे-धीरे कम हो रहा है।विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों, प्रतियोगिताओं के माध्यम से समाज को जागरूक किया जा रहा है।
ReplyDeleteएक सही पाठ्यक्रम और समाज के लोगों को सांस्कृतिक कार्यक्रमों के द्वारा जागरूक करने से एवं बच्चों के शारीरिक, बौद्धिक , मानसिक और अध्यात्मिक विकास के द्वारा हम इस समस्या से निदान पा सकते हैं
ReplyDeleteGender discrimination is very bad activities, in our school we gives equal challenges to both,
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ReplyDeleteहरियाणा में लिंग अनुपात बढ़ा है ,लोगो में जागरूकता आई है परन्तु अभी लड़का - लड़की के भेदभाव को कम करने के लिए और प्रयास किए जाने की आवश्यकता है |
ReplyDeleteYes, there are still need to work on it. This misconception has to be removed from society. We should encourage girls to be in fronts of in all the good aspects.
ReplyDeleteहमारे राज्य में लिंग के आधार पर भेद -भाव अभी भी जरी है,यद्यपि कुछ जारूकता आ रही है|अभी भी पुत्र-प्राप्ति का आशीर्वाद दिया जाता है |
ReplyDeleteहमारा राज्य छत्तीसगढ लिंगानुपात समान है ।किंतु समाज की पुरुष प्रधान मानसिकता वहीं की वहीं है । बेटी बचाओ बेटी पढाओ बस नारा लगता है । जागरूकता की आवशयकता है ।
ReplyDeleteGayatri shukla
ReplyDeleteहमारे राज्य में लिंग के आधार पर भेद -भाव न के बराबर है, यहाँ जारूकता आ रही है और महिलाओं को भी पुरुषों के समान अधिकार प्राप्त हो रहे है।
ReplyDeleteनीलम नरवाल
ReplyDeleteमैं हरियाणा राज्य से हूँ | यहाँ बीते वर्षों की तुलना में लिंगानुपात में बढ़ा है | ग्रामीण क्षेत्रों में इसके प्रति जागरूकता बढ़ी है और वर्तमान समय में भी इसके लिए प्रयास जारी है |
गुजरात में अभी भी बेटे के जन्म को महत्व दिया जाता है । लिंग अनुपात में बुरे प्रदर्शन का यही सबसे बड़ा कारण है ।
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