नीलम नरवाल छात्रों को अनेक साहित्यिक गतिविधियों के माध्यम से जैसे नाटक मंचन, वाद-विवाद प्रतियोगिता, पोस्टर निर्माण, भाषण आदि के द्वारा उनमें सांस्कृतिक और पर्यावरण के प्रति जागरूकता को अग्रसर कर सकते हैं |
विद्यार्थियों को युवा क्लब के माध्यम से विभिन्न प्रतियोगिता में जोड़कर उसमें निहित बिषय वस्तु के बारे में अवगत कराया जाना साल पर्यावरण संबंधी रूचि उत्पन्न कराया जा सकता है। पंकज कुमार रंजन
प्रिंट और नॉन प्रिंट मीडिया दोनों में प्रचलित विज्ञापनों को देखिए इनमें पुरूषों और महिलाओं को किस प्रकार चित्रित किया गया है और विज्ञापनों में उनके द्वारा किए जाने वाले क्रियाकलापों का विश्लेषण करने का प्रयास कीजिए (संकेतः देखिए कि वे किन उत्पादों का प्रचार कर रहे हैं, और किस प्रकार की भूमिका निभा रहे हैं,इत्यादि)। अपने अवलोकनों को साझा कीजिए।
‘ खिलौना आधारित शिक्षाशास्त्र ’ को लागू करने की प्रक्रिया में कई खिलौने बनाए जाते हैं। कक्षा - सत्र के बाद आप सभी बनाए गए खिलौनों का प्रभावी ढंग से उपयोग कैसे कर सकते हैं ?
समग्र शिक्षा के सांस्कृतिक और पर्यावरणीय पहलू
ReplyDeleteनीलम नरवाल
ReplyDeleteछात्रों को अनेक साहित्यिक गतिविधियों के माध्यम से जैसे नाटक मंचन, वाद-विवाद प्रतियोगिता, पोस्टर निर्माण, भाषण आदि के द्वारा उनमें सांस्कृतिक और पर्यावरण के प्रति जागरूकता को अग्रसर कर सकते हैं |
विद्यार्थियों को युवा क्लब के माध्यम से विभिन्न प्रतियोगिता में जोड़कर उसमें निहित बिषय वस्तु के बारे में अवगत कराया जाना साल पर्यावरण संबंधी रूचि उत्पन्न कराया जा सकता है।
ReplyDeleteपंकज कुमार रंजन
बच्चों में नाटक कविताएं वाद-विवाद प्रतियोगिताओं के माध्यम से संस्कृति का विकास करेंगे
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