खिलौनों की सहायता से बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि उत्पन्न की जा सकती है। पाठ को खिलौने से जोड़कर रोचक और आनंद पूर्ण शिक्षण अधिगम कराया जा सकता है। इससे बच्चे हर पाठ को खिलौनों से जोड़ने के लिए उत्साहित रहेंगे और तरकीब लगाएंगे।
नीलम नरवाल, मैं हिंदी भाषा की अध्यापिका हूँ | भाषाई शिक्षक होने के नाते मैं भिन्न-भिन्न प्रकार के खिलौनों के माध्यम से छात्रों को कथा, कहानियों , कविताओं आदि से जोड़कर इनका प्रयोग कर सकती हूँ तथा शिक्षण को उनके लिए रूचिकर बना सकती हूँ |
we can make are class more interesting and innovative and it creates a lot of enthusiasm among children to learn by enjoying and understanding everything in a playful and practical manner
खिलौनों से पठन पाठन को रोचक बनाने व अमूर्त अवधारणाओं को मूर्त रुप दिया जा सकता है। स्वच्छता और रूढ़ियों के प्रति जागरूकता जैसे विषयों पर खिलौने अहम भूमिका निभा सकते हैं।
खिलौनों के माध्यम से पठन - पाठन को अत्यंत रोचक बनाया जा सकता है। इससे छात्रों में सीखने की क्षमता का विकास होगा व छात्र विषय में रुचि भी लेंगे। साथ ही उनके रचनात्मक व कल्पनात्मक कौशल का भी विकास होगा।
खिलोने का प्रयोग करके सीखना और सिखाना और भी ज्यादा रोमांचित हो जाता हैं | इससे बच्चे हर पाठ को खिलौनों से जोड़ने के लिए उत्साहित रहेंगे और तरकीब लगाएंगे।
प्रिंट और नॉन प्रिंट मीडिया दोनों में प्रचलित विज्ञापनों को देखिए इनमें पुरूषों और महिलाओं को किस प्रकार चित्रित किया गया है और विज्ञापनों में उनके द्वारा किए जाने वाले क्रियाकलापों का विश्लेषण करने का प्रयास कीजिए (संकेतः देखिए कि वे किन उत्पादों का प्रचार कर रहे हैं, और किस प्रकार की भूमिका निभा रहे हैं,इत्यादि)। अपने अवलोकनों को साझा कीजिए।
‘ खिलौना आधारित शिक्षाशास्त्र ’ को लागू करने की प्रक्रिया में कई खिलौने बनाए जाते हैं। कक्षा - सत्र के बाद आप सभी बनाए गए खिलौनों का प्रभावी ढंग से उपयोग कैसे कर सकते हैं ?
खिलौनों के उपयोग से
ReplyDeleteखिलोने का प्रयोग करके सीखना और सिखाना और भी ज्यादा रोमांचित हो जाता हैं | खेल खेल में बच्चे बहुत अधिक सीख भी जाते हैं ,और बहुत रूचि से सीखते हैं |
Deleteखिलौनों की सहायता से बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि उत्पन्न की जा सकती है। पाठ को खिलौने से जोड़कर रोचक और आनंद पूर्ण शिक्षण अधिगम कराया जा सकता है। इससे बच्चे हर पाठ को खिलौनों से जोड़ने के लिए उत्साहित रहेंगे और तरकीब लगाएंगे।
Deleteखेल खेल में बच्चे बहुत अधिक सीख भी जाते हैं ,और बहुत रूचि से सीखते हैं |
ReplyDeleteनीलम नरवाल,
ReplyDeleteमैं हिंदी भाषा की अध्यापिका हूँ | भाषाई शिक्षक होने के नाते मैं भिन्न-भिन्न प्रकार के खिलौनों के माध्यम से छात्रों को कथा, कहानियों , कविताओं आदि से जोड़कर इनका प्रयोग कर सकती हूँ तथा शिक्षण को उनके लिए रूचिकर बना सकती हूँ |
मैं प्री प्राइमरी टीचर हूं खेल के माध्यम से बच्चे पढ़ाई में अधिक रूचि लेते हैं ।
ReplyDeletewe can make are class more interesting and innovative and it creates a lot of enthusiasm among children to learn by enjoying and understanding everything in a playful and practical manner
ReplyDeleteखिलौनों से पठन पाठन को रोचक बनाने व अमूर्त अवधारणाओं को मूर्त रुप दिया जा सकता है। स्वच्छता और रूढ़ियों के प्रति जागरूकता जैसे विषयों पर खिलौने अहम भूमिका निभा सकते हैं।
ReplyDeleteखिलौनों के माध्यम से पठन - पाठन को अत्यंत रोचक बनाया जा सकता है। इससे छात्रों में सीखने की क्षमता का विकास होगा व छात्र विषय में रुचि भी लेंगे। साथ ही उनके रचनात्मक व कल्पनात्मक कौशल का भी विकास होगा।
ReplyDeleteखिलोने का प्रयोग करके सीखना और सिखाना और भी ज्यादा रोमांचित हो जाता हैं | इससे बच्चे हर पाठ को खिलौनों से जोड़ने के लिए उत्साहित रहेंगे और तरकीब लगाएंगे।
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